भारत
सत्ता का सेमीफाइनल: कांग्रेस को तगड़ा झटका, बीजेपी को प्रचंड जीत
jantaserishta.com
31 May 2026 8:56 PM IST

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निकाय चुनाव.
नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश के निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का जबरदस्त जलवा देखने को मिला है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस सियासी 'सेमीफाइनल' में बीजेपी ने सत्ताधारी कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया. रविवार को आए नतीजों के मुताबिक, बीजेपी ने कांग्रेस के कब्जे से दो बड़े नगर निगम छीन लिए हैं. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस इस चुनाव में सिर्फ पालमपुर नगर निगम की सीट ही बचा पाई, जबकि बाकी तीन जगहों पर कमल खिला.
यह चुनावी मुकाबला राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा था. इन चार नगर निगमों के कुल 63 वार्डों में जनता ने वोट डाले थे. फाइनल नतीजों में बीजेपी ने 37 सीटों पर एकतरफा कब्जा किया, वहीं कांग्रेस महज 23 सीटों पर सिमट कर रह गई. इनके अलावा तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी है. बता दें कि मंडी के बैहना वार्ड में कोई उम्मीदवार न होने की वजह से वहां मतदान नहीं हो सका था.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इस बंपर जीत के बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने सुक्खू सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने इन नतीजों को सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता का रेफरेंडम यानी जनमत संग्रह करार दिया. बिंदल का कहना है कि प्रदेश के लोगों ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया है. खास तौर पर मंडी नगर निगम में बीजेपी ने 12 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को वहां सिर्फ एक सीट से ही संतोष करना पड़ा.
मंडी के साथ-साथ सोलन तथा धर्मशाला में भी बीजेपी ने कांग्रेस को करारी मात दी है. सोलन में मुकाबला कड़ा माना जा रहा था, लेकिन वहां भी बीजेपी ने 17 में से 10 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया. धर्मशाला में भी बीजेपी ने 11 वार्डों में बड़ी जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को सोलन में छह तो धर्मशाला में सिर्फ पांच सीटें ही मिल सकीं. वोटिंग के मामले में पालमपुर सबसे आगे रहा, जहां सबसे ज्यादा 68.97 फीसदी वोट पड़े. इसके बाद मंडी में 66.78 प्रतिशत, धर्मशाला में 60.01 प्रतिशत और सोलन में 58.32 प्रतिशत मतदान हुआ.
कांग्रेस के लिए इस पूरे चुनाव में एकमात्र राहत की खबर पालमपुर से आई. वहां पार्टी ने 15 में से 11 सीटें जीतकर अपना पुराना दबदबा कायम रखा, जबकि बीजेपी चार सीटें जीती. इस हार पर सफाई देते हुए मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि पार्टी उम्मीदवार चयन जैसे स्थानीय कारणों की गहराई से समीक्षा करेगी. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सिर्फ 15 फीसदी मतदाताओं के फैसले से पूरे प्रदेश का सियासी मूड तय नहीं किया जा सकता.
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